शुरुआती लोगों के लिए ज़रूरी योगासन
योग की शुरुआत मुश्किल आसनों या लंबे अभ्यास से करना ज़रूरी नहीं है। कुछ स्थिर आसनों से आप सीख सकते हैं कि आपका शरीर कैसे चलता है और खाने का हिसाब रखने के साथ एक शांत, सक्रिय आदत भी बना सकते हैं।
एक स्थिर आधार से शुरुआत करें
ताड़ासन देखने में आम तौर पर सीधे खड़े होने जैसा लग सकता है, लेकिन यह संतुलन और शरीर के प्रति जागरूकता सिखाता है। पैरों के बीच आरामदायक दूरी रखकर खड़े हों, घुटनों को ढीला रखें और हाथों को बगल में सहजता से टिकने दें। धीरे-धीरे सांस लेते हुए कंधों को आराम की स्थिति में रखें।

ताड़ासन से कुर्सी आसन में आने के लिए कूल्हों को पीछे ले जाएं, जैसे आप बैठने वाले हों। छाती को आराम से उठा हुआ रखें और पैरों पर बराबर भार डालें। अगर घुटनों, पीठ या सांस लेने में खिंचाव महसूस हो, तो फिर से सीधे खड़े हो जाएं।
आसान आसनों से ताकत बढ़ाएं
अधोमुख श्वानासन के लिए पहले हाथों और घुटनों के बल आएं, फिर कूल्हों को ऊपर और पीछे उठाएं। रीढ़ को लंबा रखने में मदद मिले तो घुटनों को मोड़ लें और एड़ियों को ज़बरदस्ती ज़मीन की ओर न ले जाएं। उंगलियां फैलाएं और हाथों व पैरों के बीच प्रयास को बांटें।
वीरभद्रासन II की शुरुआत पैरों को चौड़ा करके खड़े होने से होती है। एक पैर आगे की ओर रखें और दूसरे को थोड़ा अंदर की ओर मोड़ें। आगे के घुटने को मोड़ें, हाथों को कंधों की ऊंचाई पर फैलाएं और आगे वाले हाथ के ऊपर से देखें। शुरुआत में थोड़ी देर आसन में रहें, फिर दूसरी ओर दोहराएं।
हल्की गतिशीलता और आराम को जगह दें
मार्जरी-बितिलासन रीढ़ को हिलाने-डुलाने का अभ्यास करने का अच्छा तरीका है। हाथों और घुटनों के बल आकर सांस छोड़ते हुए पीठ को धीरे से गोल करें, फिर सांस लेते हुए छाती को सहजता से आगे की ओर ले जाएं। गति उतनी ही रखें जितनी सहज लगे; आसनों को ज़्यादा बड़ा बनाने की कोशिश न करें।
बालासन ज़्यादा सक्रिय गतिविधियों के बीच शांत होकर रुकने का मौका देता है। कूल्हों को एड़ियों की ओर ले जाएं, हाथों को आगे फैलाएं या बगल में टिकाएं और ज़रूरत हो तो सिर को सहारा दें। अगर इस मुद्रा में सिकुड़न महसूस हो, तो घुटनों को थोड़ा चौड़ा कर लें या आराम के लिए कोई दूसरी सहज मुद्रा चुनें।
योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें
कुछ आसनों से शुरुआत करें और उन्हें तब तक दोहराएं, जब तक एक आसन से दूसरे में जाना जाना-पहचाना न लगे। अभ्यास कितनी देर और कितनी बार करना सही रहेगा, यह आपके समय, अनुभव और उस दिन शरीर कैसा महसूस कर रहा है, इस पर निर्भर करता है। एक ही अभ्यास में हर आसन करने की कोशिश से ज़्यादा अहम नियमितता है।
खाने का हिसाब रखने से पता चल सकता है कि आप क्या खाते हैं, जबकि योग के बारे में छोटा-सा नोट आपकी दिनचर्या के दूसरे पहलू को दर्ज कर सकता है। आप लिख सकते हैं कि कौन-से आसन स्थिर लगे, आपने अपने पैरों की स्थिति कहां बदली और अभ्यास से पहले व बाद में आपकी ऊर्जा कैसी थी। तेज़ दर्द, चक्कर या असामान्य तकलीफ महसूस हो तो रुक जाएं। अगर आगे जारी रखने को लेकर कोई संदेह हो, तो पहले योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें।