संतुलित रूटीन के लिए लोअर-बॉडी वेट ट्रेनिंग की बेहतरीन एक्सरसाइज़
सबसे उपयोगी लोअर-बॉडी एक्सरसाइज़ किसी एक मांसपेशी पर ध्यान देने के बजाय कई तरह के मूवमेंट पैटर्न को शामिल करती हैं। ऐसे विकल्प चुनें जिनमें आपका नियंत्रण बना रहे, जो आपके उपकरणों के अनुकूल हों और जिनमें आप धीरे-धीरे प्रगति कर सकें।
मुख्य मूवमेंट पैटर्न से शुरुआत करें
संतुलित लोअर-बॉडी रूटीन में आम तौर पर स्क्वैट, हिप हिंज और एक पैर से की जाने वाली एक्सरसाइज़ शामिल होती है। ये पैटर्न मिलकर जांघों, कूल्हों, नितंबों और स्थिरता बनाए रखने में मदद करने वाली मांसपेशियों को ट्रेन करते हैं।
हर किसी के लिए एक ही एक्सरसाइज़ सबसे अच्छी नहीं होती। आपके लिए सही विकल्प आपके अनुभव, मोबिलिटी, उपलब्ध उपकरणों और हर मूवमेंट के दौरान महसूस होने वाली सहजता पर निर्भर करेंगे। इसलिए शुरुआत ऐसे वज़न से करें जिसे आप गति की पूरी रेंज में बिना जल्दबाज़ी के नियंत्रित कर सकें।
स्क्वैट और हिप हिंज
स्क्वैट के अलग-अलग प्रकारों में गोब्लेट स्क्वैट, फ्रंट स्क्वैट और बैक स्क्वैट शामिल हैं। पैर ज़मीन पर टिकाए रखें, घुटनों को पंजों की दिशा में जाने दें और उतना ही नीचे बैठें जितना आप स्थिर स्थिति बनाए रखते हुए कर सकें।
हिप हिंज में डेडलिफ्ट और रोमानियन डेडलिफ्ट शामिल हैं, जिन्हें डम्बल, बारबेल या किसी अन्य ऐसे वज़न से किया जा सकता है जिसे आप आसानी से संभाल सकें। कूल्हों को पीछे ले जाएं, वज़न को शरीर के करीब रखें और पीछे की ओर झुकने के बजाय सीधे खड़े होकर मूवमेंट पूरा करें।
एक पैर से की जाने वाली एक्सरसाइज़ और सहायक एक्सरसाइज़
स्प्लिट स्क्वैट, रिवर्स लंज और स्टेप-अप एक बार में शरीर के एक तरफ को ट्रेन करते हैं, इसलिए ये संतुलन और नियंत्रण के लिए उपयोगी हैं। ज़रूरत हो तो सहारा लें, धीरे-धीरे मूव करें और कदमों के बीच ऐसी दूरी चुनें जिससे दोनों पैर स्थिर रहें।
ग्लूट ब्रिज, हिप थ्रस्ट और काफ रेज़ बड़ी मूवमेंट्स के पूरक हो सकते हैं। मुख्य लिफ्ट्स के बाद इन्हें सहायक एक्सरसाइज़ के तौर पर करना अच्छा रहता है, लेकिन इन्हें हर सेशन में शामिल करना ज़रूरी नहीं है।
रिकवरी को ध्यान में रखकर प्रगति की योजना बनाएं
कुछ एक्सरसाइज़ चुनें और अच्छी तकनीक का अभ्यास करने के लिए उन्हें नियमित रूप से दोहराएं। वज़न, रेपिटिशन या मूवमेंट की रेंज धीरे-धीरे बढ़ाएं; एक बार में सिर्फ़ एक चीज़ बदलें और जब सही फॉर्म बनाए रखना मुश्किल होने लगे तो सेट रोक दें।
आपका फ़ूड लॉग यह समझने में मदद कर सकता है कि आपका सामान्य खान-पान ट्रेनिंग और रिकवरी को सहारा दे रहा है या नहीं, खासकर नियमित भोजन और आपकी ज़रूरत के मुताबिक पर्याप्त प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के मामले में। सही मात्रा हर व्यक्ति के लिए अलग होती है, इसलिए किसी ऐसे तय लक्ष्य के पीछे भागने के बजाय, जो आपके लिए सही न हो, अपनी ट्रेनिंग के नोट्स के साथ फ़ूड ट्रैकिंग की समीक्षा करें।