मिड-बैक और लैट्स के लिए असरदार एक्सरसाइज़
आपके लैट्स और मिड-बैक आपको खींचने, पोश्चर को सहारा देने और शोल्डर ब्लेड्स को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। संतुलित रूटीन में रोइंग और नीचे की ओर खींचने वाली एक्सरसाइज़ के साथ स्थिर, सोच-समझकर की गई तकनीक शामिल होती है।
जानें कि आप किन मांसपेशियों की ट्रेनिंग कर रहे हैं
लैट्स चौड़ी मांसपेशियां हैं, जो आपकी पीठ के दोनों ओर नीचे तक फैली होती हैं। मिड-बैक में शोल्डर ब्लेड्स के आसपास की कई मांसपेशियां शामिल होती हैं, इसलिए कोई एक एक्सरसाइज़ सभी मांसपेशियों को बराबर तौर पर ट्रेन नहीं करती।

रो में आमतौर पर शोल्डर ब्लेड्स को पीछे खींचने पर अधिक जोर होता है, जबकि पुलडाउन और पुल-अप नीचे की ओर खींचने वाले मूवमेंट की ट्रेनिंग देते हैं। आपकी ग्रिप, कोहनी की दिशा और शरीर की पोज़िशन से यह बदल सकता है कि आपको मेहनत कहां महसूस होती है, लेकिन इनसे कोई एक हिस्सा पूरी तरह अलग करके ट्रेन नहीं होता।
मिड-बैक के लिए रो करें
सीटेड केबल रो, चेस्ट-सपोर्टेड डंबल रो या रेज़िस्टेंस-बैंड रो, तीनों अच्छे विकल्प हो सकते हैं। बांहें सीधी रखकर शुरुआत करें, धड़ को स्थिर रखें और कंधों को कानों की ओर उठाए बिना कोहनियों को पीछे खींचें।

लैट्स को ज्यादा शामिल करने के लिए कोहनियों को शरीर के पास रखें और नीचे की पसलियों की ओर खींचें। कोहनियों को थोड़ा ज्यादा बाहर की ओर ले जाने से शोल्डर ब्लेड्स के आसपास की मांसपेशियां आमतौर पर अधिक काम करती हैं, बशर्ते आप आरामदायक और स्थिर पोज़िशन बनाए रख सकें।
वर्टिकल पुलिंग एक्सरसाइज़ शामिल करें
लैट पुलडाउन और असिस्टेड पुल-अप, रो से अलग दिशा में लैट्स की ट्रेनिंग करते हैं। पहले शोल्डर ब्लेड्स को स्वाभाविक रूप से चलने दें, फिर बार को हाथों से खींचने की कोशिश करने के बजाय कोहनियों को नीचे खींचें।

ऐसी ग्रिप चुनें जिससे आप कलाई या कंधों को असहज स्थिति में डाले बिना आसानी से मूव कर सकें। जब छाती और धड़ को नियंत्रित रखना मुश्किल होने लगे, तब नीचे खींचने वाला मूवमेंट रोक दें। इसे पूरा करने के लिए बहुत पीछे न झुकें।
अपने रूटीन की योजना बनाएं और उसे ट्रैक करें
अपने प्रोग्राम में रोइंग मूवमेंट और वर्टिकल पुल, दोनों शामिल करें। फिर ऐसा रेज़िस्टेंस चुनें जिससे आप स्थिर तकनीक बनाए रख सकें। सेट और रेप्स की सही संख्या आपके अनुभव, रिकवरी और पूरे ट्रेनिंग प्लान पर निर्भर करती है। इसलिए आप जो करते हैं, उसे लिखें और धीरे-धीरे बदलाव करें।

आपका फूड लॉग यह समझने में मदद कर सकता है कि आपका सामान्य खान-पान ट्रेनिंग और रिकवरी को सहारा दे रहा है या नहीं, लेकिन एक्सरसाइज़ में जली कैलोरी का अनुमान सिर्फ मोटा अंदाज़ा होता है। ऊर्जा खर्च शरीर के आकार, मेहनत, एक्सरसाइज़ के चुनाव और सेशन की अवधि के हिसाब से बदलता है। इसलिए मशीन या वेयरेबल के अनुमान को उतनी ही कैलोरी वापस खाने की सटीक मात्रा न मानें।